वातावरण :–
अधिगम के लिए उपयुक्त वातावरण जरूरी है क्योंकि प्रत्येक वातावरण में अधिगम संभव नहीं है इस अध्याय में हम अधिगम के लिए उपयुक्त वातावरण में महत्वपूर्ण तत्व या बिंदुओं के ऊपर विचार रखेंगे जो कि अधिगम या शिक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं ।
अधिगम के लिए आवश्यक तत्व :–
विद्यार्थी का पूर्व ज्ञान :–
अगर अधिगम या पढ़ने के दौरान नवीन ज्ञान को विद्यार्थी के पूर्व ज्ञान से जोड़कर प्रस्तुत किया जाए तो विद्यार्थी के लिए सीखना आसान होगा और अधिगम के लिए उचित वातावरण का सृजन होगा जिससे बालक अपने ज्ञान का दूसरे ज्ञान में उपयोग कर सकता है ।
तत्परता :–
रुचि जिज्ञासा तथा पूर्व ज्ञान से जोड़कर अगर विद्यार्थी को अधिगम के दौरान मानसिक रूप से तैयार किया जाए तो ऐसे में अधिगम प्रभावशाली रहेगा तथा अधिगम के लिए उचित वातावरण का निर्माण होगा जिससे बालक किसी चीज को नहीं सीखना चाहता है तब भी वह सीख लेता है अगर अच्छे वातावरण का निर्माण हो जाता है तो ।
अभ्यास:–
अगर अधिगम में विद्यार्थी को सीखे के अधिगम को अभ्यास मिलना लाने को बीच-बीच में कहा जाए तो विस्मृति की संभावना कम होगी और अधिगम के लिए उपयुक्त वातावरण बनेगा जिससे बालक अपने पूर्व को याद करता रहेगा और उसकी संभावनाएं व्यक्त होती रहेगी जिससे वह आगे पढ़ने के लिए और उपयुक्त समझेगा ।
रुचि :–
उचित अधिगम माहौल के लिए यह जरूरी है कि शिक्षक की योग्यता को आधार नामांकन विद्यार्थी की रुचि को वरीयता दी जाए इससे अधिगम के लिए उचित वातावरण बनेगा और बच्चे के अनुरूप उसको शिक्षा मिल पाएगी जिसके लिए वह रुचि रखता हो उसी प्रकार की शिक्षा उसे दी जाए ताकि वह भविष्य में जाकर अपनी रूचि के अनुसार ज्ञान की प्राप्ति कर सके और जीवन कौशल को बढ़ावा दे सके ।
पुरस्कार या पुनर्बलन :–
अच्छा प्रदर्शन अगर पुरस्कृत या पुनर्बलन किया जाता है तो अधिगम अगली बार और बेहतर करने का प्रयास करता है और अधिगम के लिए उचित वातावरण का सृजन होता है जिससे बालक को एक सकारात्मक दिशा मिलती है इस सकारात्मक का प्रयोग करके और सृजनशील बालक बन सकता है ।
अंतः क्रिया :–
कक्षा में अगर अधिगम के दौरान शिक्षक शिक्षार्थियों कीमत अगर विचारों का आदान-प्रदान मुक्त ढंग से होता है तो विद्यार्थी बिना किसी डर या भाई के अपना भ्रम दूर कर सकता है और ऐसे अधिगम के लिए उचित माहौल तैयार होता है इससे बालक और शिक्षक के बीच में एक सामंजस्य बना रहता है और अंतरिया के द्वारा दोनों एक दूसरे से सीख लेते रहते हैं ।
गतिविधि आधारित अधिगम :–
अगर अधिगम में करके सीखने की सुविधा हो तो यह आस्था एवं व्यवहारिक ज्ञान होगा और इससे अधिगम के लिए उचित माहौल तैयार होगा जो कि बच्चे के अंदर एक स्थाई ज्ञान और व्यवहारिक जीवन से जुड़ी हुई बातों को पढ़ाया जाता है जिससे व्यवहार में उसके परिवर्तन होता है और ज्ञान में वृद्धि होती है ।
कक्षा का वातावरण :–
अगर कक्षा में समानता सहानुभूति समूह भावना सहकारिता जैसे गुण पाए जाते हैं तो अधिगम के लिए उचित माहौल बनेगा बच्चे एक दूसरे से सामाजिक बनाकर रहते हैं जिसके कारण बच्चों में एक घृणा की भावना नहीं होती है का सामान जैसे आ जाता है तो पढ़ाई में दिक्कत आने लगती है ।
शिक्षण विधि :–
अगर शिक्षण विधि बच्चे की उम्र क्षमता ग्रहण शक्ति आदि के अनुकूल हो तो ऐसे में अधिगम के लिए उचित वेतन का निर्माण होगा वह शिक्षक को हमेशा बच्चे के अनुरूप शिक्षा देनी चाहिए वह जिस प्रकार की गतिविधि करता हो या उस उसकी मानसिक स्थिति जिस प्रकार उसी प्रकार की उसको शिक्षा दी जाए ।
शिक्षक का स्वभाव :–
अगर शिक्षा का स्वभाव सहानुभूति और मित्रवत व्यवहार से युक्त हो तो अधिगम के लिए उचित वातावरण का निर्माण होगा जिससे बच्चे और शिक्षक के बीच में एक सामंजस्य बन जाता है।
पाठ्यवस्तु की प्रकृति :–
अगर विषय वस्तु बच्चे की उम्र कहां शक्ति और क्षमता के अनुकूल हो तो विद्यार्थी भली-भांति सीख पाएगा और अधिगम के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण होगा जिससे बच्चा अपने उम्र के अनुरूप ही शिक्षा ग्रहण कर सकता है
विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
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