दिव्यांगता के प्रकार :–
दिव्यांग जनों के अधिकार अधिनियम ने दिव्यांगता के कुल 21 प्रकार बताए हैं –
दिव्यांगता में शारीरिक रूप से दिव्यांग बालक
दृष्टि बाधित बालक
पूर्ण रूप से दृष्टि बाधित बालक
श्रवण दृष्टि दोष युक्त बालक
मूक बधिर बालक
हकलाने तुतलाने वाले बालक
कम सुनने वाले बालक इत्यादि को शामिल किया जाता है ।
दिव्यांगों की शिक्षा के लिए विशेष प्रबंध :–
1– पिछले कुछ वर्षों में दिव्यांग जनों की शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों में भारतीय सरकार ने कई प्रशंसा करने योग्य प्रयास किए हैं ।
2– खासकर 2016 में लाए गए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को लगाने के बाद इनकी शिक्षा और रोजगार को सरकार ने गंभीरता से लिया है ।
3– लेकिन सच्चाई यह भी है कि भारत में दिव्यांग जनों की शिक्षा में अभी भी काफी खामियां हैं ।
दिव्यांगों की शिक्षा के विशेष प्रावधान :–
1 – शारीरिक रूप से दिव्यांग बालक :–
ऐसे दिव्यांगों में केवल शारीरिक दिव्यांगता होती है ऐसे बालकों को कक्षा में बैठने के लिए उचित बैठक व्यवस्था दें उन्हें पूरी तरह से सामान्य कक्षा में समावेशित किया जा सकता है सरकारी जिला चिकित्सालय में ऐसे बालकों को दिव्यांगता का परीक्षण करके उन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाता है तथा वे स्कूल आराम से जा सके उसके लिए 3 पहिया वाहन भी मुफ्त में भी प्रदान किया जाता है ।
2– दृष्टि बाधित बालक :–
इस समूह में दो प्रकार के बालक आते हैं –
A– साफ ना देख पाने वाले बालक अधिक दृष्टि दोष वाले बालक :–
ऐसे बालकों को या तो साफ देखने में सहायक चश्मे प्रदान करें या फिर कक्षा में इन्हें आगे बढ़ाएं जिला चिकित्सालय समय-समय पर विद्यालयों में कैंप लगाकर ऐसे बालकों की आंखों की जांच कर के उपचार एवं मुफ्त में चश्मा प्रदान करता है ।
B – पूर्ण रूप से अंधे बालक :–
ऐसे बालकों को ब्रेल लिपि की सहायता से सिखाया जाता है ब्रेल लिपि के आविष्कारक फ्रांस के लुइस ब्रेल हैं भारतीय ब्रेल लिपि में कुल 6 बिंदु होते हैं ।
3 – श्रवण दृष्टि दोष युक्त बालक :–
इनको भी दो भागों में बांटा जाता है –
A – कम सुनने वाले बालक :–
ऐसे बालक जो सुनते तो हैं पर उन्हें कम सुनने वाले बालक या आंशिक श्रवण क्षमता वाले बालक कहा जाता है ऐसे बालकों को आवाज बढ़ा कर सुनाने वाली मशीन या करण यंत्र दिया जाए या फिर इन्हें कक्षा म आगे बैठाया जाए ।
B – मूक बधिर बालक :–
वे बालक जो बिल्कुल भी नहीं सुन सकते हैं ऐसे बालकों को मूक बधिर बालक कहा जाता है ऐसे बालकों को ऐसी जगह बैठाये जहां से यह शिक्षक को अच्छे से देख सके वैसे इनके लिए संकेत भाषा का बेहतर प्रयोग किया जाता है ।
4– हकलाने या तुतलाने वाले बालक :–
हकलाना तुतलाना कोई बीमारी नहीं है बल्कि विकार है इस समय रहते दूर किया जा सकता है खासकर हकलाने वाले बालकों के लिए संवर्धित वाक ( Prolonged Speech )। की व्यवस्था की गई है ।
दिव्यांगजन अधिनियम 2016 के कुछ प्रमुख प्रावधान :–
1 – सरकारी नौकरियों एवं शैक्षिक क्षेत्र में आरक्षण पाने के लिए न्यूनतम 40 % दिव्यांगता मानकों के अनुसार होनी चाहिए ।
2 – इस अधिनियम से सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों का आरक्षण 3% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया है और शिक्षा में यह आरक्षण 5 % करने का प्रावधान है ।
3 – इस अधिनियम के द्वारा दिव्यांगों के लिए सुगम्य पुस्तकालय की स्थापना की गई है जैसे दिव्यांगजन ऑनलाइन मोड से गुणवत्ता युक्त पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं ।
4 – सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वालंबन योजना द्वारा 2022 तक 25 लाख दिव्यांग छात्रों एवं व्यक्तियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाना है ।
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