सीखना और सिखाना

बुधवार, 19 जनवरी 2022

लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक / रूढ़ीवादी / परंपरावादी का सिद्धांत क्या क्यों कैसे UPTET/CTET/SUPPER TET


 

लॉरेंस कोहलबर्ग ( नैतिक दुविधा ) :–

   –   कोहल बर्ग एक जर्मन अमेरिकन मनोवैज्ञानिक थे ।

   –  उनका अध्ययन हिंज नामक व्यक्ति पर आधारित था ।

  –  कोहल वर्ग का प्रयोग 10 से 16 वर्ष के लड़कों पर किया गया ।

  – कोहल वर्ग के अनुसार विकास नैतिक विकास सीधी रेखा में नहीं होता बल्कि  "नैतिक तर्कना " का परिणाम होता है ।जिसका एक भाग है " नैतिक दुविधा " है ।



       नैतिक विकास के चरण :–

   [1] – पूर्व नैतिक / पूर्व रूढ़िवादी / पूर्व परंपरावादी चरण :–

   ( 3 से 10 वर्ष ) 

                    महत्वपूर्ण बिंदु  – नैतिक दुविधा

       ( A ) –  अहमकेंद्रित स्वार्थी बच्चा
                     जैसे– सारी आइसक्रीम मुझे दो ।

       ( B ) –  दंड एवम आज्ञापलन
                    जैसे– राम को भी खिलौना दो नही कूटे जाओगे

नोट:–     पहली अवस्था में बच्चे की स्वतंत्र इच्छा तथा माता-                   पिता के नियंत्रण की बीज नैतिक दुविधा बनती है ।
       
   –       इस अवस्था में नैतिकता का अभाव रहता है तथा नैतिकता                 वाह कारको से आती है ।

    [2] – नैतिक / रूढ़िवादी / परंपरावादी अवस्था 

              ( 10 से 13 वर्ष ) :–

                          नैतिक दुविधा

         ( A ) –  अच्छा लड़का अच्छी लड़की अवस्था ( अनुकरण )
                     जैसे– उनके बेटे जैसे बनो ।

          ( B ) –  कानून व्यवस्था अवस्था

               जैसे– वैधानिक नियमों को मानते हुए आत्मनिर्भरता                               मैं अपना निर्णय खुद लूंगा ।

          उत्तर नैतिक / उत्तर परंपरावादी / उत्तर रूढ़िवादी चरण :–

                    ( 13 से 16 वर्ष )

                                  नैतिक दुविधा

         ( A ) –  सामाजिक अनुबंध

                       जैसे– अपना अपना भला करना ।

          ( B ) –  सार्वभौमिक नैतिकता

                      जैसे– सभी का भला हो चाहे मेरा भला ना हो 
                                उसे खिलाओ मैं भूखा रह लूंगा ।

           महत्वपूर्ण बिंदु क्या क्यों कैसे :–

– लारेंस कोहलबर्ग का सिद्धांत उनकी पुस्तक  " द साइकोलॉजी आफ मोरल डेवलपमेंट "  ( THE PSHYCOLOGY OF MORAL DEVELOPMENT ) से ली गई है ।

         – कोहल बर्ग ने अपने सिद्धांत सांस्कृतिक अंतर को महत्व दिया  ।

उन्होंने अपने प्रयोग में महिलाओं को या बालिकाओं को शामिल नहीं किया है इसलिए इनकी इस सिद्धांत की आलोचना इसी अनुरूप से की जाती है ।

      कोहल वर्ग के अनुसार नैतिक तर्कना एवं नैतिक व्यवहार के बीच गहरा संबंध है ।


      
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